<p style="text-align: justify;"><strong>कानपुर</strong>: आईपीएस सुरेन्द्र के सुसाइड केस में नया मोड़ आ गया है. कानपुर के एक वकील ने सीएमएम कोर्ट में सुरेन्द्र को सुसाईड के लिए प्रेरित करने पर अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया है. इस मुक़दमे में मीडिया में छापी खबरों को आधार बनाया गया है. इसके साथ पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा मामले को दबाने का आरोप लगाया गया है. इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितम्बर को होगी.</p> <p style="text-align: justify;"><a href="https://static.abplive.in/wp-content/uploads/sites/2/2018/09/12105108/knp.jpg"><img class="alignnone wp-image-962206 size-full" src="https://ift.tt/2CL6zTR" alt="" width="615" height="407" /></a></p> <p style="text-align: justify;">आईपीएस सुरेन्द्र दास ने बीते 5 सितम्बर को सुबह तडके सल्फास खाकर सुसाइड करने का प्रयास किया था. उन्हें इलाज के लिए रीजेंसी हास्पिटल में एडमिट कराया गया था. इलाज के दौरान बीते 9 सितम्बर को उनका निधन हो गया था.</p> <p style="text-align: justify;"><a href="https://static.abplive.in/wp-content/uploads/sites/2/2018/09/12105136/knp-2.jpg"><img class="alignnone wp-image-962207 size-full" src="https://ift.tt/2Nx0P4j" alt="" width="660" height="402" /></a></p> <p style="text-align: justify;">कानपुर के वरिष्ट अधिवक्ता प्रमोद कुमार सक्सेना ने सीएमएम कोर्ट में परिवार दाखिल किया है. उन्होंने कहा कि आईपीएस सुरेन्द्र दास कानपुर में एसपी पूर्वी के पद पर तैनात थे. उनके आत्महत्या के बाद एफ़आईआर 156 (3) मजिस्ट्रेट के सामने दाखिल किया है. जिसमें कहा गया है कि इस पूरे मामले को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दबाये जाने, इधर-उधर घुमा कर इसे नष्ट भ्रष्ट करने की कोशिश की गयी है. मृतक के परिवार वाले इतने ज्यादा दुखी हैं कि उन्होंने अभी तक इस मामले को कोर्ट में या प्राथमिकी के रूप में दर्ज करने का प्रयास नहीं किया है.</p> <p style="text-align: justify;"><a href="https://static.abplive.in/wp-content/uploads/sites/2/2018/09/12105154/knp-3.jpg"><img class="alignnone wp-image-962208 size-full" src="https://ift.tt/2CNdwnk" alt="" width="684" height="358" /></a></p> <p style="text-align: justify;">यह मेरा मानवीय अधिकार है वकील होने के नाते ये मेरा कर्तव्य है. इसमें किसी का नाम शामिल नहीं किया गया है, ये जांच का विषय है. एफ़आईआर में मैंने अज्ञात में ही प्रार्थना की है. जब इसकी जांच होगी तब सच सामने आएगा. एक आईपीएस अधिकारी के साथ इस तरह की अप्रिय घटना होती है और उसे छिपाने का प्रयास किया जाता है. इसकी सच्चाई को समाज के सामने लाना मेरा न्यायिक कर्तव्य है. इस पूरे मामले में एसएसपी से लेकर डीजीपी तक के बयांन भ्रांत कारी हैं.</p>
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