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PM मोदी ने 'मन की बात' में की वीर सावरकर की निडरता की सराहना

दुख की बात है कि हम लंबे समय तक 1857 की घटनाओं को केवल विद्रोह या सिपाही विद्रोह कहते रहे. वास्तव में न सिर्फ उस घटना को कम करके आंका गया बल्कि वो हमारे स्वाभिमान को भी ठेस पहुंचाने का एक प्रयास भी था.

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