ऊषा ठाकुर पहले इंदौर से विधायक थीं, लेकिन इस बार उन्हें इस सीट से उतार दिया गया. वह बड़े बेमन से इस चुनाव में उतरी थीं, क्योंकि ये सीट बीजेपी कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय की सीट मानी जाती है. उसी समय कहा गया था कि इस सीट से उनकी राह आसान नहीं है, लेकिन डॉ. भीमराव आंबेडकर की जन्मभूमि वाली ये सीट बीजेपी के लिए हमेशा लकी रही है.
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